चांद भी सास्वत साथ रूवरू दे गया, मेरे हिंद के अप्रति।म भाल बिंम्भ को। आस्तीन के सर्प कुछ न कर पायेगा, हनुमंत की अकूत मातृ गर्जना का।। झुकता नही है सामर्थ्य अभिनंदन, अभिनंदन ...
व्रज पुत्रों की अभिलेख खातिर, पवन पुत्र ने बीरों हौंसला अपना दिया होगा। चांद आसमां स्तब्ध हिंद खातिर, सप्तश्रृषियों ने पुष्प अभिवादन किया होगा। विटप ने पुष्पांदित करन...
वरदान दो मां, वरदान दो मां। मुझको निज वाणी लहर में, स्वर साकार स्थान दो मां वरदान दो------ सत्याचरण की गोद से, सर्व साधना का, अमूल्य कोस दो। जल थल नभ आंचल से, प्रखर ज्ञान का प्रज्ज्व...
ये कविता राष्ट्र चेतना और रोशन से है। मूल्यों का अभिनंदन ============== मूल्यों का अभिनंदन कर, भेदभाव को सर्व जनित मत करना। स्वार्थ की इच्छा अभेद शक्ति ने, रिश्तों में अपनत्व परित्या...