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मैरी मिट्टी मेरी

चांद भी सास्वत साथ रूवरू दे गया, मेरे हिंद के अप्रति।म भाल बिंम्भ को। आस्तीन के सर्प कुछ न कर पायेगा, हनुमंत की अकूत मातृ गर्जना का।। झुकता नही है सामर्थ्य अभिनंदन, अभिनंदन ...

वालाकोट के व्रज प्रहरी

व्रज पुत्रों की अभिलेख खातिर, पवन पुत्र ने बीरों  हौंसला अपना दिया होगा। चांद आसमां स्तब्ध हिंद खातिर, सप्तश्रृषियों ने पुष्प अभिवादन किया होगा। विटप ने पुष्पांदित करन...

सरस्वती वंदना

वरदान दो मां, वरदान दो मां। मुझको निज वाणी लहर में, स्वर साकार स्थान दो मां वरदान दो------ सत्याचरण की गोद से, सर्व साधना का, अमूल्य कोस दो। जल थल नभ आंचल से, प्रखर ज्ञान का प्रज्ज्व...

मूल्यों का अभिनंदन

ये कविता राष्ट्र चेतना और रोशन से है। मूल्यों का अभिनंदन ============== मूल्यों का अभिनंदन कर, भेदभाव को सर्व जनित मत करना। स्वार्थ की इच्छा अभेद शक्ति ने, रिश्तों में अपनत्व परित्या...

A flower and a honey bee

एक भ्रमर आसक्ति _______________________________________ प्रिय प्रेम का,दिलसाज नेक पुजारी, तू मेरे हृदय की प्रेम प्रेरित फुलवारी। जाने अनजाने वैरूखी के मौसम में, मैं कब मधुप आसक्ति बन जाऊं। आंगन के, मुस्कुराहट के प्रसूनों में, गुंजायमान हो रस चुन चुन लें जाऊं। रस सगर का भ्रमण कर रस नगर में, हर्षातिरेक हो गगन में मुक्त हो जाऊं। स्वप्न भरी स्मृति के मधुर मारूत में, आशा आकांक्षा से कल्पित गेहूं बनाऊं। समर्पण लिए समर्पित कमनीय कंठ में, अनुराग राग आलाप का भ्रमित हो जाऊं। सुनील सिंधवाल'रोशन'उत्तराखंडी 05/06/1986