मैरी मिट्टी मेरी

चांद भी सास्वत साथ रूवरू दे गया,
मेरे हिंद के अप्रति।म भाल बिंम्भ को।
आस्तीन के सर्प कुछ न कर पायेगा,
हनुमंत की अकूत मातृ गर्जना का।।

झुकता नही है सामर्थ्य अभिनंदन,
अभिनंदन का कल्प नही होगा।
बंधी समां कल्पना हिंद पुष्प स्वछंद,
पौषित बृंद कली अवरूद्ध नही होगा।।

अर्क रश्मियों ने रश्मि आगाज किया,
मन प्रहार आत्म शाद निशब्द किया,।
एक छटा इंद्र धनुष ने सैलाब किया,
प्रलय को धरा विप्लव आछादित किया।।

रूकने की यात्रा असंकल्प मत करना,
रज रज में मूल्य अमूल्य भाव मत करना।
द्रोह भाषा मन में कितना भी कर लेना,
पहरेदार प्रहरी की मन की बात समझ लेना।।

अभी आखेट को समझ नया रूप दिया,
अस्मिता जज्बा खातिर आतंक को शमूल प्रहार किया।
प्रहार का जुल्मों को,नट का बहुरूप दिया,
"रोशन" हिंद ने विश्व प्रेरक नया आयाम दिया।।

सुनील सिंधवाल'रोशन'केदारखंडी
01/03/2019

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