सरस्वती वंदना
वरदान दो मां, वरदान दो मां।
मुझको निज वाणी लहर में,
स्वर साकार स्थान दो मां
वरदान दो------
सत्याचरण की गोद से,
सर्व साधना का, अमूल्य कोस दो।
जल थल नभ आंचल से,
प्रखर ज्ञान का प्रज्ज्वलित पुंज दो।
परोपकार रत सर्व भाव का,
नव विर्कीण सा कलस दो मां।
वरदान दो मां--------
करूणामय हृदय प्रशस्त कर,
संसार से वैमनस्य स्वप्न दूर कर दो।
सुनहरे भावों का श्रृंगार कर,
स्वप्न में अमिट छाया झंकृत कर दो।
अवोध राह के कांटे काट कर,
सफल व्यक्तिव का मार्ग दो मां।
वरदान दो------
जिंदगी समर्पण पल पुष्प का,
अमुअतिल आचरण परिधान दो।
प्रकृति के अनगिनत ज्वार का,
वीणा वादिनी का मृदु झंकार दो।
शील सौम्य अदम्य प्रकाश का,
निर्मल अविरल सजल हार दो।
वरदान दो-----
सुनील सिंधवाल'रोशन'केदारखंडी
06/02/1988
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