वालाकोट के व्रज प्रहरी
व्रज पुत्रों की अभिलेख खातिर,
पवन पुत्र ने बीरों हौंसला अपना दिया होगा।
चांद आसमां स्तब्ध हिंद खातिर,
सप्तश्रृषियों ने पुष्प अभिवादन किया होगा।
विटप ने पुष्पांदित करने को,
खिलने से अपने को अवरूद्ध नही किया होगा।
भ्रमर ने गुंजित कर पुष्पों को,
आवेशित कर मधु बनाने से रोका नही होगा।
धरती ने निज रज कण को,
सुगंधित पौध उगने से वंचित नही किया होगा।
हिमवंत ने उत्पत्ति उत्थान सरित को,
निरूतर राह में अवसाद ग्रसित नही किया होगा।
अदृश्य अनामिका पुष्प धरा को,
वात्सल्य प्रेम से मां को कभी रोका नही होगा।
राष्ट्र हित जावांज राष्ट्र प्रेमियों को,
अंतर्मन में अमिट प्रेम द्वंद से रोका नही होगा।
कुत्तों की टेढ़ी पूंछ झुकाने को,
सतप्रतिशत बांकुरों का अभियान चला होगा।
गीदड़ों की भभकी कायरता को,
मादक हूरों की चाहत को जहन्नुम दिया होगा।
जब तक जिंदा शेर स्वाभिमान को,
नतमस्तक भाल लहू कीमत पर नही करने देगा।
जीवित सनातन भूभाल कुरूक्षेत्र को,
राष्ट्र कीर्ति ग़ौरव गाथा अब रूकने नही देगा।
सरहदों पर आंख जमाते गीदड़ों को,
बाज नजरों से नेस्तनाबूद प्रहार करना होगा।
सामर्थ्यी बनाकर बबर शेर हिंद को,
रणभेरी बजी प्रजातंत्र में मायूस नही होना होगा।
सुनील सिंधवाल'रोशन'केदारखंडी
01/03/2019
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