मूल्यों का अभिनंदन
ये कविता राष्ट्र चेतना और रोशन से है।
मूल्यों का अभिनंदन
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मूल्यों का अभिनंदन कर,
भेदभाव को सर्व जनित मत करना।
स्वार्थ की इच्छा अभेद शक्ति ने,
रिश्तों में अपनत्व परित्याग किया।
अपनों से हृदयी रिश्ता अपनों ने,
शर्तों पर जीने का कैसा ज्ञान दिया।
मूल्यों का अभिनंदन-------
बराबरी हित की अपेक्षा के लिए,
हर बार मानसिक आघात किया।
स्वप्नों की खातिर मतलब लिए,
सामाजिक तृष्णा निज प्राय किया।
मूल्यों का अभिनंदन---------
आशा और विश्वास उंमीदों को,
हर बार दर्द पारितोषिक किया।
भोलेपन की मासूम भावनाओं को,
पल पल में स्वार्थ हित रोंद दिया।
मूल्यों का अभिनंदन---------
अज्ञानी भी सर्वज्ञ ज्ञानी के चोले में,
सौहार्द समर में कुंठित कर तोल गये।
आइना की प्रतिबिंब तस्वीरें सांसों में,
सांसें हृदय संवेदना को हित वोल गये।
मूल्यों का अभिनंदन-------
सुनील सिंधवाल'रोशन'केदारखंडी
19/06/2019
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